1. संघर्ष क्या है- संघर्ष किसी अन्य व्यक्ति अथवा व्यक्तियों की इच्छा का जानबूझकर विरोध करने अथवा उसे शक्ति से पूर्ण कराने से सम्बन्धित प्रयत्न है। संघर्ष प्रतिकूलता के पश्चात प्रारम्भ होता है। स्वार्थपरता बढ़ने से व्यक्ति दूसरे को हानि पहुंचाने लगता है। इसके विरोध में दूसरा व्यक्ति अपनी रक्षा करने का प्रयत्न करता है और उसको हानि पहुंचाने से रोकता है। जिससे मनोवैज्ञानिक स्तर पर संघर्ष की रूपरेखा बनती है तथा अवसर आने पर प्रत्यक्ष संघर्ष होने लगता है। 'जीवन संघर्षमय है इससे घबराकर थमना नही चाहिए' संघर्ष मनुष्य को मज़बूत बनाता है , संघर्ष से मनुष्य को कभी नहीं डरना चाहिए। हिम्मत रखकर हमेशा आगे बढ़ना चाहिए। संघर्ष की प्रकृति दोस्तों संघर्ष में द्वन्दियों का पूरा ज्ञान होता है। उद्देश्य व लक्ष्य प्राप्त करने के साथ-साथ विरोधी का दमन भी करना होता है। शक्ति का अधिकाधिक उपयोग होता है। संवेग (क्रोध) तेज होते हैं। सतर्कता अधिक होती है। स्थितियों का सूक्ष्म से सूक्ष्म विश्लेषण होता है। व्यक्ति प्रधान होता है। लक्ष्य विरोधी की ओर अग्रसित होते हैं। नियम व कानूनों का उ...
दोस्तों वर्तमान में हम लोग जितनी तेज से आगे बढ़ रहे है, उतनी ही तेजी से हमारी खुशियाँ , रिश्ते छूट रहे है, इस ब्लॉग के माध्यम से मैंने जीवन की अनेक समस्याओ के बारे में लिखा है।