दोस्तों मनुष्य कितनी भी मेहनत कर ले, परंतु उसे अपने पर भरोसा नहीं है तो वह सफल नहीं हो सकता। अपने पर जिसे विश्वास रहता है उसे अंदर से ही अलौकिक शक्ति का बल मिलता है। जन्म से ही कोई महान अथवा गुणवान पैदा नहीं होता, लेकिन दृढ़तापूर्वक अभ्यास से हरेक व्यक्ति अपने में गुण पैदा कर सकता है। बहुत से विचारक ऐसे हुए हैं जिन्हें बचपन में बहुत डर लगता था, परंतु अच्छे संगत विचारों से उनमें आत्मविश्वास जागा और वे ऐसे निडर बने कि दुनिया की कोई ताकत उन्हें नहीं डरा सकी। मनुष्य का मन चंचल है इसलिए बुद्धि भी स्थिर नहीं रहती। बिना बुद्धि स्थिर हुए आत्मविश्वास नहीं हो सकता। इसलिए सत्पुरुषों की संगत अति आवश्यक है। अस्थिर बुद्धि वाला व्यक्ति सूखी पत्ती की तरह हवा में उडऩे वाला, सदैव दूसरों पर ही निर्भर रहता है। परंतु जिसकी अपनी मजबूती होती है वह अपने बल पर चलता है। आत्मविश्वास पर खड़ा किया गया भवन हमेशा सुरक्षित रहता है। नि:संदेह आत्मविश्वास अनेकों रोगों की दवा है, जहां व्यक्ति अनेक प्रकार की भूत-भविष्य की चिंताओं में घुटता रहता है। और परिश्रम से जी चुराता है, वहीं आत्मविश्वासी को किसी प्रकार की असफलता का ...
दोस्तों वर्तमान में हम लोग जितनी तेज से आगे बढ़ रहे है, उतनी ही तेजी से हमारी खुशियाँ , रिश्ते छूट रहे है, इस ब्लॉग के माध्यम से मैंने जीवन की अनेक समस्याओ के बारे में लिखा है।