दोस्तों डर मात्र एक ‘विचार’ है। ‘ऐसा हो गया तो… कहीं ऐसा न हो जाए… कहीं मैं मर न जाऊँ… मैं इंटरव्यू में फेल हो गया तो… पेपर लिखते वक्त मुझे जवाब याद नहीं आए तो…’ डर के एक विचार से इंसान ऐसा चित्र बना डालता है, जहाँ वह इस एक विचार को फलते-फुलते देखता है और कोई अपने बीमार रिश्तेदार से मिलने अस्पताल में चला गया। रिश्तेदार की बीमारी के लक्षण जान लिए और वह सोचने लगा कि ‘ये लक्षण तो मुझमें भी हैं। इसका अर्थ मुझे भी यह बीमारी है क्या?’ यह विचार आते ही वह डर गया। ऐसे में विचारों के प्रति अपनी सजगता बढ़ाते रहना और डर के विचारों का अच्छे तरीके से इस्तेमाल करना, यही डर पर शिकस्त पाने का उत्तम तरीका है। नमस्कार दोस्तों LifeWithAshish में आपका स्वागत है , आपका भरपूर सहयोग मिल रहा है इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद। आज मै एक नए टॉपिक पर लिखने जा रहा हूँ , जिसका नाम है " अपने अंदर के डर (Fear ) से कैसे जीतें " दोस्तों अगर आपसे पूछा जाए कि आप लोगो के अंदर कौन कौन से है, तो अधिकतर लोग हर type के डर बताने लगेंगे , इनमे से कुछ मै आपको बता रहा हूँ , डर दो type क...
दोस्तों वर्तमान में हम लोग जितनी तेज से आगे बढ़ रहे है, उतनी ही तेजी से हमारी खुशियाँ , रिश्ते छूट रहे है, इस ब्लॉग के माध्यम से मैंने जीवन की अनेक समस्याओ के बारे में लिखा है।