Skip to main content

Posts

Showing posts with the label रिश्तों की कदर

रिश्तों की कदर

दोस्तों जिंदगी की हकीकत को जितना जल्दी समझ जाएं उतना ही बेह्तर है , ज्यादातर लोग हमेशा इसी ख्याल में जिंदगी निकाल देते है की अगर हमने किसी की लिए कुछ किया है तो वो शायद उनके लिए कुछ करेंगे, पर हकीकत में ऐसा होता नहीं है. ज्यादातर तो नहीं ही होता है, और लोग अक्सर मायूसी का शिकार होते रहते है।  एक चीज़ का जवाब दीजिये - कोई आपके लिए कुछ क्यूँ करे , सिर्फ इसीलिए की वो आपके दोस्त है या फिर माता पिता या कोई रिश्तेदार हैं।  इन नातों के चलते आपको कोई एक या दो बार तो शायद पूछ भी ले पर उस से ज्यादा की उम्मीद करना आपकी गलतफहमी ही होगी और उस से ज्यादा कुछ नहीं।  कहीं मैंने एक बार कहा था, कुछ ठीक से याद नहीं - पर वो कुछ ऐसा था: है कुछ बात इस इंसान में ऐसी की, अपनों से पहले अक्सर वो अपने की सोचे, गुनाह तो ये कतई हो नहीं सकता, पर फितरत ही इन्सान ने ऐसी बना ली की, कुछ करने से पहले वो खुद की एक बार तो सोचे. दोस्तों आपको एक बात हमेशा ध्यान रखनी पड़ेगी की आज हम हर किसी चीज़ को कोई मतलब से ही जोड़कर देखते है. यहाँ तक की अगर मै कोई बात आपके फायदे की भी बता दू तो आप एक बार उसमे भी जरूर सोचेंगे क...