दोस्तों जब आपके जीवन में दुख आता है तो आप उस दुख से बचने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। उस दुख से बचने के लिए संघर्ष करते हैं।
दोस्तों कुछ दिन पहले एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि मैंने आज तक कोई बुरा काम नहीं किया और किसी के बारे में गलत नहीं सोचा, हमेशा दूसरो की मदद भी करता हूँ, फिर भी इतना दुःख मेरे साथ क्यों ? उस समय मै कोई जवाब नहीं दे पाया।
आज मै आप लोगो के सामने इसके बारे में कुछ share करना चाहता हूँ, तो दोस्तों आज का मेरा टॉपिक है-
"अच्छे लोगो के साथ दुःख और परेशानियां क्यों?"

मेरे दोस्तों जिंदगी में अक्सर एक ही सवाल आता है कि आखिर अच्छे इंसान के साथ बुरा क्यों होता है ? इसका मतलब अच्छे लोग दुखी क्यों रहते हैं, तो क्या दोस्तों हम लोग अच्छे काम न करे.
दोस्तों सबसे पहले आपको कर्म के सिद्धांत को स्वीकार करना होगा, मतलब जो "कर्म करोगे तो फल मिलेगा"
अच्छा दोस्तों आपने कभी सोचा है कि बुरे लोगों की सफलता के पीछे क्या राज है?
कुछ कारण मैंने notice क्या है जो मै आपको share कर रहा हूँ।
दोस्तों जब आप ये सोचते है कि आप बहुत सज्जन है , कभी किसी के साथ बुरा काम नहीं किया है , और किसी बारे में गलत नहीं सोचा है , और भगवान् पर भी श्रद्धा है , पूजा -पाठ भी रोज करते है , मंदिर भी जाते है , तब अच्छे लोग हमेशा यही सोचते है कि हम तो अच्छे है मेरे साथ बुरा क्यों होगा। इस प्रकार आप सभी कर्म के सिद्धांत ( कर्म करोगे तो फल मिलेगा ) की अनदेखी कर देते है। इसका परिणाम ये होता है आप कई बार सफलता नहीं पाते।
वही जिसे आप बुरा व्यक्ति सोच रहे थे, बुरा व्यक्ति हमेशा सोचता रहता है और पता होता है कि उसे जो करना है खुद ही करना है क्योंकि मैंने बुरे काम किये है भगवन भी मदद नहीं करेंगे और उसकी सहायता भी करने वाला भी नहीं है क्योंकि वो लोगो की नजर में बुरा है। इस प्रकार वो अपनी पूरी ताकत के साथ प्रयास करता है. इस प्रकार वो कर्म के सिद्धांत का पूरा पालन करता है और सफल हो जाता है।
दोस्तों मै कहता हूँ आपका अच्छा होना आपकी महानता नहीं है वो आपके स्वाभाव की मजबूरी है। आपको इससे सफलता नहीं मिल सकती है। इससे आप धोखा मत खाना क्योंकि आप सोचते है मै तो अच्छा हूँ।
वही दूसरी तरफ आप किसी के साथ बुरा नहीं करते है, तो यह केवल आपका गुण है इसमें आपकी सफलता की कोई गारंटी नहीं।
जब बुरा TIME आता है तो यह मत सोचिये की भगवान् तुम्हारे लिए सहायता के लिए आएंगे। ये गलत सहमिया मत पालना दोस्तों, कियोंकि आपके मन में यही रहता है की मई तो अच्छा हु, अच्छा ही होगा।
अधिकतर जिस भाव में अच्छा होना देखा जाता है वो है असलियत में दयालुता का स्वाभाव। दयालु लोग प्रायः लोगो के काम आते हैं लेकिन उनका परिणाम सकारात्मक नहीं मिलता है आखिर इसकी वजह क्या है? उनकी किस्मत होती है , या उनकी सोच का गलत होना या स्वाभाव की कोई गलती।
दोस्तों जो हमने अनुभव किये है वो मै आपको सहरे कर रहा हूँ --
दोस्तों जो स्वभाव से दयालु होते है वो हमेशा दुसरो की मदद करते रहते है क्योंकि वो उनका स्वाभाव होता है।
कुछ लोग ऐसे भी जाते है खुद के लिए कुछ करने से ज्यादा दूसरो के मदद करने से ख़ुशी मिलती है, इनके दुःख का काऱण सामने वाले व्यक्ति का स्वार्थी रवैया होता है।
दोस्तों आपको यह समझने की जरूरत है की यह आपका बुरा रवैया नहीं है जिसके लिए आपको दुखी होना चाहिए बल्कि ये सामने वाले व्यक्ति कास्वार्थीपन होता है।
दोस्तों मुझे एक कहावत याद आ रही है यहाँ -"करने की सौ शिकायत , न करने की एक शिकायत"
इनका हर कदम दूसरों को खुश करने के लिए होता है, उसे पूरा करते हुए ये अपने सपनों को पूरा करने के लिए काम नहीं कर पाते।
दोस्तों सबसे पहले आपको कर्म के सिद्धांत को स्वीकार करना होगा, मतलब जो "कर्म करोगे तो फल मिलेगा"
अच्छा दोस्तों आपने कभी सोचा है कि बुरे लोगों की सफलता के पीछे क्या राज है?
कुछ कारण मैंने notice क्या है जो मै आपको share कर रहा हूँ।
दोस्तों जब आप ये सोचते है कि आप बहुत सज्जन है , कभी किसी के साथ बुरा काम नहीं किया है , और किसी बारे में गलत नहीं सोचा है , और भगवान् पर भी श्रद्धा है , पूजा -पाठ भी रोज करते है , मंदिर भी जाते है , तब अच्छे लोग हमेशा यही सोचते है कि हम तो अच्छे है मेरे साथ बुरा क्यों होगा। इस प्रकार आप सभी कर्म के सिद्धांत ( कर्म करोगे तो फल मिलेगा ) की अनदेखी कर देते है। इसका परिणाम ये होता है आप कई बार सफलता नहीं पाते।
वही जिसे आप बुरा व्यक्ति सोच रहे थे, बुरा व्यक्ति हमेशा सोचता रहता है और पता होता है कि उसे जो करना है खुद ही करना है क्योंकि मैंने बुरे काम किये है भगवन भी मदद नहीं करेंगे और उसकी सहायता भी करने वाला भी नहीं है क्योंकि वो लोगो की नजर में बुरा है। इस प्रकार वो अपनी पूरी ताकत के साथ प्रयास करता है. इस प्रकार वो कर्म के सिद्धांत का पूरा पालन करता है और सफल हो जाता है।
दोस्तों मै कहता हूँ आपका अच्छा होना आपकी महानता नहीं है वो आपके स्वाभाव की मजबूरी है। आपको इससे सफलता नहीं मिल सकती है। इससे आप धोखा मत खाना क्योंकि आप सोचते है मै तो अच्छा हूँ।
वही दूसरी तरफ आप किसी के साथ बुरा नहीं करते है, तो यह केवल आपका गुण है इसमें आपकी सफलता की कोई गारंटी नहीं।
जब बुरा TIME आता है तो यह मत सोचिये की भगवान् तुम्हारे लिए सहायता के लिए आएंगे। ये गलत सहमिया मत पालना दोस्तों, कियोंकि आपके मन में यही रहता है की मई तो अच्छा हु, अच्छा ही होगा।
अधिकतर जिस भाव में अच्छा होना देखा जाता है वो है असलियत में दयालुता का स्वाभाव। दयालु लोग प्रायः लोगो के काम आते हैं लेकिन उनका परिणाम सकारात्मक नहीं मिलता है आखिर इसकी वजह क्या है? उनकी किस्मत होती है , या उनकी सोच का गलत होना या स्वाभाव की कोई गलती।
दोस्तों जो हमने अनुभव किये है वो मै आपको सहरे कर रहा हूँ --
हमेशा दूसरो की मदद के लिए तैयार रहना :
दोस्तों जो स्वभाव से दयालु होते है वो हमेशा दुसरो की मदद करते रहते है क्योंकि वो उनका स्वाभाव होता है।
कुछ लोग ऐसे भी जाते है खुद के लिए कुछ करने से ज्यादा दूसरो के मदद करने से ख़ुशी मिलती है, इनके दुःख का काऱण सामने वाले व्यक्ति का स्वार्थी रवैया होता है।
दोस्तों आपको यह समझने की जरूरत है की यह आपका बुरा रवैया नहीं है जिसके लिए आपको दुखी होना चाहिए बल्कि ये सामने वाले व्यक्ति कास्वार्थीपन होता है।
दोस्तों मुझे एक कहावत याद आ रही है यहाँ -"करने की सौ शिकायत , न करने की एक शिकायत"
स्वयं के लिए सोचना स्वार्थी बनना नहीं होता :
इनका हर कदम दूसरों को खुश करने के लिए होता है, उसे पूरा करते हुए ये अपने सपनों को पूरा करने के लिए काम नहीं कर पाते।
किसी से बहुत उम्मीद रखना :
आपने किसी दूसरे की मदद इसलिए नहीं की ताकि वो भी आपकी सहायता करे , ऐसा है तो यह दिखाता है कि उन कामों के बदले आप भी कोई इच्छा रख रहे हैं, दोस्तों यही कारण है आपकर दुःख का।
आपको यह समझने की जरूरत है कि सक्षम होते हुए किसी के लिए कुछ करना, यहां तक कि अगर आपने अपने विवेक के साथ किसी के लिए कोई त्याग किया।
दोस्तों इंसानो को दुःख-तकलीफे क्यों साहनी पड़ती है वो सब समय और संयोग के बस में है। मै यह यह नहीं कह रह रहा हूँ की आप कर्म मत करो। कर्म करो फल की इक्षा मत करो।
दोस्तों ईस्वर जो चाहता है वो करता है , जो उसे सही या जरूरी लगता है , न कि हर वो काम जिसे करने के लिए वह काबिल है। ईस्वर जो करता है सही करता है उसमे कोई कमी नहीं है। वह इंसानो से कोई गलत काम नहीं करवाता है , बल्कि इंसानो के कर्म ही होते है जो दुखी होते है।
संसार में फैली बुराइयों के कुछ हद तक इंसान भी जिम्मेदार है। मै यहाँ ये नहीं कह रहा हूँ की आप अच्छे काम करना छोड़ दो।
सोचिये एक व्यक्ति कैसे धीरे धीरे गलत काम कर बैठता है पर उसको पात ही नहीं चल पाता है की वो गलत इंसान बन गया है। हर कोई अपनी ही ईक्षाओं में फँस कर मोह माया जाल में फंस जाता है। फिर उनकी इक्षाएं इतनी बढ़ जाती है की वो गलत कदम उठा लेते है या वो अपनी बुरी खुहाहिन्शो के आगे हार मान लेता है और आगे चल कर उसका रिजल्ट भी बुरा ही होता है।
दोस्तों आपको याद होगा कि महाभारत के युद्ध में भगवान् श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बने थे, भगवान् श्रीकृष्ण ने उनके साथ युद्ध नहीं लड़ा बल्कि उन्होंने अर्जुन को सिर्फ सही रास्ता दिखाया , युद्ध तो अर्जुन को लड़ना पड़ा.
दोस्तों अंत में बस यही कहूंगा की मैंने ऊपर जो भी लिखा है आप बहुत ध्यान से पढियेगा और समझियेगा। मेरा मतलब यह नहीं है की अच्छे लोग अपने अच्छे काम करना छोड़ दे और बुरे इंसान बन जाए दोस्तों मै तो बस यही समझाने का प्रयास कर रहा हूँ की आप कोई भी काम कर रहे हो तो उस काम को पूरी ईमानदारी से करो उसमे स्वार्थ वाली भावना नहीं आना चाहिए। कभी भी अपने अंदर अहंकार नहीं लाना चाहिए।
भगवान गलत वक्त में आपकी सहायता जरूर करते है पर उनका तरीका अलग होता है जो आप कभी जान ही नहीं पाते है।

धन्यवाद
आपको यह समझने की जरूरत है कि सक्षम होते हुए किसी के लिए कुछ करना, यहां तक कि अगर आपने अपने विवेक के साथ किसी के लिए कोई त्याग किया।
सब समय और संयोग के वश में है:
दोस्तों इंसानो को दुःख-तकलीफे क्यों साहनी पड़ती है वो सब समय और संयोग के बस में है। मै यह यह नहीं कह रह रहा हूँ की आप कर्म मत करो। कर्म करो फल की इक्षा मत करो।
दोस्तों ईस्वर जो चाहता है वो करता है , जो उसे सही या जरूरी लगता है , न कि हर वो काम जिसे करने के लिए वह काबिल है। ईस्वर जो करता है सही करता है उसमे कोई कमी नहीं है। वह इंसानो से कोई गलत काम नहीं करवाता है , बल्कि इंसानो के कर्म ही होते है जो दुखी होते है।
क्या इंसान खुद इसका जिम्मेदार है :
संसार में फैली बुराइयों के कुछ हद तक इंसान भी जिम्मेदार है। मै यहाँ ये नहीं कह रहा हूँ की आप अच्छे काम करना छोड़ दो।
सोचिये एक व्यक्ति कैसे धीरे धीरे गलत काम कर बैठता है पर उसको पात ही नहीं चल पाता है की वो गलत इंसान बन गया है। हर कोई अपनी ही ईक्षाओं में फँस कर मोह माया जाल में फंस जाता है। फिर उनकी इक्षाएं इतनी बढ़ जाती है की वो गलत कदम उठा लेते है या वो अपनी बुरी खुहाहिन्शो के आगे हार मान लेता है और आगे चल कर उसका रिजल्ट भी बुरा ही होता है।
दोस्तों आपको याद होगा कि महाभारत के युद्ध में भगवान् श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बने थे, भगवान् श्रीकृष्ण ने उनके साथ युद्ध नहीं लड़ा बल्कि उन्होंने अर्जुन को सिर्फ सही रास्ता दिखाया , युद्ध तो अर्जुन को लड़ना पड़ा.
दोस्तों अंत में बस यही कहूंगा की मैंने ऊपर जो भी लिखा है आप बहुत ध्यान से पढियेगा और समझियेगा। मेरा मतलब यह नहीं है की अच्छे लोग अपने अच्छे काम करना छोड़ दे और बुरे इंसान बन जाए दोस्तों मै तो बस यही समझाने का प्रयास कर रहा हूँ की आप कोई भी काम कर रहे हो तो उस काम को पूरी ईमानदारी से करो उसमे स्वार्थ वाली भावना नहीं आना चाहिए। कभी भी अपने अंदर अहंकार नहीं लाना चाहिए।
भगवान गलत वक्त में आपकी सहायता जरूर करते है पर उनका तरीका अलग होता है जो आप कभी जान ही नहीं पाते है।

दोस्तों आपसे अपील है कि , मेरी बातो पर सही से सोचियेगा ,जरूर अगले ब्लॉग में फिर मिलेंगे, एक नए टॉपिक पर, तब तक के लिए हंसते -रहिए ,हँसते – रहिए ,जीवन अनमोल है, मुस्कुराते रहिए !
धन्यवाद
Comments