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जीवन में घमंड ना करे

जब कोई व्यक्ति आपका सम्मान करता है और हम उसे प्रेमपूर्वकर जवाब देते है तो यह हमारा आत्मसम्मान होता है लेकिन यदि उसी जवाब को हम क्रूरता से देते है तो वह घमण्ड कहलाता है। जो चीजें गिनी जा सकें वो यकीनन खत्म हो ही जाती हैं। रावण भी तो सबसे बड़ा ज्ञानी था , आपको पता है कि केवल वो अपने घमंड के ही कारण हार गया। माना कि बरगद और पीपल जैसे विशाल हम नहीं पर गमलों में उगने वाली तुलसी भी किसी से कम नहीं। (1 ) अपनी उम्र, चेहरा, शिक्षा ,और पैसे पर घमंड : सब ने पैसा तो बहुत कमा लिया पर उस पैसे का क्या मोल हैं जब उनके घमंड के कारण रिश्ते टूट रहे हो,  सामने वाले से ठीक तरीके से बात ना करता हो।  कुछ लोग ऐसे भी मिल जाते है कि वो अपने पैसों के ऊपर घमंड करते हैं , वो सोचते है कि हम ही सबसे ज्यादा अमीर है वो दुसरो को बहुत घमंड वाली नजर से देखते हैं। दूसरे लोगो को सही तरीके से बात भी नहीं करते हैं, उनको यही लगता है ये मुझसे गरीब है। दोस्तों ये वही लोग होते है जिनके परिवार में सब लोग नौकरी कर रहे हैं, या उनको कोई पुरानी जायदाद मिली हो, पर ये लोग भूल जाते है की घमंड परिवार को बर्...

किसी से उम्मीद मत रखो

दोस्तों  कभी भी किसी से उम्मीद नहीं करना चाहिए क्योंकि जब उम्मीद टूटती है बहुत दर्द होता है। तो इसलिए मेरे दोस्तों उम्मीद सिर्फ अपने से ही रखना चाहिए दूसरो से नहीं। तो दोस्तों आज हम इसी topic पैर आलेख लिखने जा रहे हैं।  किसी से उम्मीद मत रखो इंसान उम्मीदों से बंधा हुआ एक जिद्दी परिंदा है, जो घायल भी उम्मीदों से है और जिंदा भी उम्मीदों पर है .उम्मीद आधी जिंदगी है और मायूसी आधी मौत है . अगर कोई तुमसे भलाई की उम्मीद रखे तो उसे मायूस मत करो क्योंकि लोगों की जरूरत का तुम से वास्ता होना तुम पर भगवान्  का खास करम है।  दोस्तों आपके जीवम में ऐसा अक्सर होता होगा जब हर तरफ से हम अपनी हिम्मत हारने के करीब होते हैं तभी न जाने कहा से या किसी के द्वारा  अचानक कुछ ऐसा हो जाता है या कुछ  पढ़ने को मिल जाता है कि हिम्मत स्वयं  आ जाती  है , दोस्तों  यह भगवान्  की तरफ से होता है, वह हमें उम्मीद की किरण थमा देता है।   दोस्तों अगर खुश रहना चाहते हो तो ना उम्मीद रखो और न शिकवा करो. उम्मीद भगवान से लगाई हो तो टूटने क...

जैसा सोचोगे वैसा आप बन जाओगे

दोस्तों दुनिया में कुछ ही लोग सम्मान, ख़ुशी, दौलत, समृद्धि, और सफलता क्यों हासिल कर पाते हैं; जबकि अधिकतर लोग एक औसत जीवन ही जी पाते हैं? तो दोस्तों आज हम इसी टॉपिक पर आलेख लिखने जा रहे हैं।  जैसा सोचोगे वैसा आप बन जाओगे इसकी वजह क्या है? ऐसा क्यों होता है? शायद कुछ लोग यहाँ पर ये सवाल कर सकते है की ये बड़ी सोच क्या बला है? सच में..! लोगो के सोच में अंतर होता है। उनके शिक्षा, अनुभव, माहौल और जरूरते भले ही उनकी सोच पर प्रभाव डालता है, लेकिन फिर भी इन्सान की सोच का आकार अलग अलग होता है। हुनरमंद लोग जिन्होंने कमजोरियों को जीता,  बड़ी सोच वाले लोग बहुत कम क्यों है? हाँ, ये सच है, लोग सोचते ही नहीं! हमारे जीवन वही सब और उतना ही अच्छा (बुरा) होता है जिसकी हम जितनी अच्छी( बुरी) कल्पना कर सकते हैं। जो चीज हमारे अंदर (मन मे) विद्यमान है वही चीज बाहर दिखती है। हमारा मस्तिष्क इस ब्रह्मांड मस्तिष्क का एक छोटा सा भाग है और हम जो कल्पना करते है ब्रह्मांड की शक्तियां वो सब हमारे समक्ष रखने का प्रयास करती हैं। इसे कुछ लोगों ने " law of attraction" का नाम भी दिया है। हमारा मस्तिष्क हमेश...

वास्तविक दुनिया में जीऐं

दोस्तों झूठी दुनिया (सोशल-मीडिया) पर नहीं वास्तविक दुनिया में दोस्त बनायें, ऐसे दोस्त जिनको आप अपने मन की बातें बता सकें, और जो आपको अच्छी सलाह दे सकें, सोशल मीडिया में आपके दोस्तों की लिस्ट बहुत बड़ी है , और रोज सोशल मीडिया फ्रेंड को Hallo , Hi करते हो , पर दोस्तों आपको पता है आपके जिंदगी में वास्तविक दोस्त कौन -कौन से है जो आपका दुःख में साथ दे रहे हैं , वर्तमान में युवा अकेलेपन का शिकार हो रहे है, और अकेलेपन में वो बहुत सी गलतियां कर देते है, जो नुक्सान पहुंचाती है उनके जीवन को।                   " वास्तविक दुनिया में जीऐं" अधिकतर युवा आकर्षण वाले प्यार के दलदल में फंस जाते हैं, और समय बीतने के बाद पता चलता है कि वो अपने आप को इस दलदल से निकल ही नहीं पाते है। नौकरी , परिवार , और जिम्मेदारिओं के बोझ में इंसान इतना उलझ गया है कि वो अपनी सभी खुशिओं को त्याग कर रहा है , और भी पता नहीं कौन कौन से दर्द अपने मन में में लिए घूम रहे हैं। सोशल मीडिया में आपके दोस्तों की लिस्ट बहुत बड़ी है , और रोज सोशल मीडिया फ्रेंड को Hallo , Hi करते हो ...

Tension स्थिति में शांत रहना सीखें

दोस्तों आज मै एक आलेख लिखने जा रहा हूँ।  "Tension स्थिति में शांत रहना सीखें"   दोस्तों जब हम लोग तनाव में होते हैं, तब कभी-कभी हमारी बॉडी इस तनाव को एक अटैक की तरह समझ लेती है और हमें “लड़ो या भागो मोड” में छोड़ देती है। इसकी वजह से एड्रेनालाईन (adrenaline) जैसे हॉर्मोन का स्राव  होता है, जो हमारी बॉडी वेसल्स को जकड़कर रखता है, आपकी साँस को तीव्र और ऊँची कर देता है, और जिसकी वजह से आपकी हार्ट रेट बढ़ जाती है। समय के साथ-साथ, हमें इस तरह की तनाव भरी प्रतिक्रिया की आदत हो जाती है, और जो हमारे दिमाग की “आटोमेटिक रियेक्टिविटी बन जाती हैं। दोस्तों आपका शरीर जब “लड़ो या भागो” की स्थिति में पहुँच जाता है, तभी आपकी सहानुभूति तंत्रिका तंत्र (sympathetic nervous system) आपके सांस लेने की प्रक्रिया को गंभीरता से गड़बड़ कर सकता है। आप जब तनाव में होते हैं, तब आपको साँस लेने में तकलीफ महसूस हो सकती है, लेकिन फिर भी कुछ लम्बी, गहरी साँस लेने पर ध्यान देना भी जरूरी है। आपके शरीर में हर वक्त चलने वाली बातों पर ध्यान दे , तनाव के सोर्स : दोस्तों क्या आपका दिल इसी लिए ...

व्यस्त रहो मस्त रहो

"ओफ्फो बिस्तर की चादर कितनी बार भी सही करो फिर सलवट पड़ जाती"या "सोफे के कवर कुछ सेट से नहीं लग रहे"ये माथे पर बाल की जो लट है कुछ जम सी नहीं रही" ये उदाहरण है हर चीज़ को परफेक्शन से देखने के,ये चेहरे मोहरे से लेकर बैंक बैलेंस तक में हो सकता है। लोगो के दिमाग में हर काम का एक परफेक्शन लेवल होता है।किसी को कमरे का फर्श चमकता चाहिए किसी को दीवार और छत भी दागों से रहित।जब कोई अपने परफेक्शन लेवल तक पहुँच ना पाए और उसे पाना एकमात्र उद्देश्य बना लेता है तो जन्म लेते है बहुत से डिसऑर्डर। पहला व्यक्ति खुद को परफेक्शनिस्ट बनाने में लगा रहता है।पढ़ने में अव्वल तो मुझे डांस भी आना चाहिए।ऑफिस में टॉप पर तो मुझे घर में भी 10 आउट ऑफ 10 चाहिए।ये लोग खुद को ही मोटीवेट करते है औऱ अचीव न कर पाने पर खुद ही निराश हो जाते है। दूसरा व्यक्ति खुद के साथ अपने खास रिश्तों से परफेक्शन की उम्मीद रखता है,ऐसे लोग अपने खास लोगों में या तो हंसी के पात्र बनते है या नफरत के क्योंकि ये हर बात, हर चीज़ में कमी निकालते हैं। तीसरा ये सबसे खतरनाक केटेगरी होती है,दूसरे शब्दों में जिन्हें हम साइको कहत...

गलतफहमी सुविचार

दोस्तों घर के रिश्ते तो स्वाभाविक ही बनते है लेकिन बाहर के रिश्ते सिर्फ आपसी समझदारी से ही बनते है। लेकिन जब रिश्ते टूटते है तो उसके पीछे बहुत से कारण होते है।  इन सभी कारणों में सबसे बड़ा कारण जो है वो है ग़लतफहमी जिसे अंग्रेजी में मिसअंडरस्टैंडिंग (misunderstanding) कहा जाता है।  शायद अब समझ रहे होंगे कि इस लेख में क्या कहने का प्रयास किया गया है।  यदि नहीं समझे तो हम आपको आगे बताते है।  आदि युग के समय से ही मानव एक सामाजिक प्राणी रहा है।  भारतीय मूल्यों और संस्कृति के अनुसार मानव जीवन में रिश्तों की बहुत ही बड़ी महत्ता है।  रिश्ता कोई भी हो उसे निभाने की परम्परा हमें अपने इतिहास से भी बखूबी मिलती है।  कभी कभी तो हमारे जीवन में कब रिश्ते बन जाते है जुड़, जाते है, हमे खुद भी पता नहीं चल पाता। रिश्तों नातों को समझाने के लिए न जाने ही लेख लिखे गए, अनेको ग्रंथो की रचना भी हुई। रिश्तों की परिभाषा पर दूरदर्शन और रेडियो पर अनगिनत कार्यक्रम बनाये गए और फिल्म भी बनाये गयी।  इन सब में जो रिश्तों को बनते हुए दिखाया गया तो रिश्तों को बिगड़ते हुए दिखाया गया।...